रायपुर। नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी को लेकर जारी विवाद के बीच खैरागढ़ विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रभावित ग्रामीणों के पक्ष में हस्तक्षेप की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए आवास बनाने के नाम पर गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़ना न नैतिक रूप से उचित है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप।
पत्र में विधायक ने लिखा कि नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए लगभग 85 गरीब परिवारों के घरों को ध्वस्त किए जाने की जानकारी अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत और जमा-पूंजी से बने घरों का इस तरह उजड़ना किसी भी संवेदनशील समाज के लिए चिंता का विषय है।
यशोदा नीलांबर वर्मा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को अपने अधिकारों, सम्मान और हितों की रक्षा के लिए चुना है, न कि गरीबों की छत छीनकर उनके लिए सुविधाएं तैयार करने के लिए। उन्होंने कहा कि वे नकटी गांव के प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी हैं और उनके न्याय की आवाज शासन तक पहुंचाना अपना दायित्व मानती हैं।
विधायक ने मुख्यमंत्री से मांग की कि नकटी गांव में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही अब तक प्रभावित सभी परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास, आजीविका की निरंतरता और उचित मुआवजे की व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जाए।
अपने पत्र में उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि यदि विधायक आवास कॉलोनी का निर्माण आवश्यक है, तो नवा रायपुर अथवा किसी अन्य उपयुक्त शासकीय भूमि का चयन किया जाए। उनका कहना है कि नवा रायपुर में पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है, जहां आधुनिक विधायक कॉलोनी विकसित की जा सकती है और किसी भी गरीब परिवार को बेघर होने की पीड़ा नहीं झेलनी पड़ेगी।
पत्र के अंत में विधायक ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार प्रभावित परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायपूर्ण और संवेदनशील फैसला करेगी।
नकटी गांव को लेकर विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा का यह पत्र अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है।