सस्ती पेट्रोल के चक्कर में महंगी हुई शक्कर! ₹60 किलो पहुंची चीनी
Monika••2 min read
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महंगाई : चीनी के बढ़ते दाम ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। जिस चीनी का इस्तेमाल हर घर की चाय से लेकर मिठाइयों तक में होता है, उसकी कीमत कई जगहों पर बढ़कर करीब ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गई है। ऐसे में पहले से महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के घरेलू बजट पर एक और बोझ बढ़ गया है।
•पेट्रोल में एथेनॉल और गन्ने का बढ़ता इस्तेमाल
भारत में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाने पर जोर दिया जा रहा है। एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में गन्ने का एक हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन की ओर जाने से चीनी की उपलब्धता और कीमत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी तेज है कि “सस्ती पेट्रोल के चक्कर में शक्कर महंगी हो गई।” हालांकि चीनी की कीमत केवल एथेनॉल नीति से तय नहीं होती। उत्पादन, मांग, स्टॉक, मौसम, सरकारी नीतियां और बाजार की स्थिति भी कीमत को प्रभावित करती हैं।
• ₹40 से ₹60 तक पहुंची कीमत का असर
अगर किसी बाजार में चीनी ₹40 के आसपास से बढ़कर ₹60 किलो हो गई है, तो उपभोक्ता को सीधे ₹20 प्रति किलो ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। यानी 5 किलो चीनी खरीदने पर करीब ₹100 अतिरिक्त खर्च हो सकता है।
त्योहारी सीजन में इसका असर और ज्यादा महसूस हो सकता है, क्योंकि मिठाई और घरेलू इस्तेमाल के लिए चीनी की मांग बढ़ जाती है।
• सवाल सरकार से—राहत कब?
आम आदमी के लिए पेट्रोल की कीमत के साथ-साथ रसोई का खर्च भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में अब सवाल यह है कि सरकार ईंधन नीति के साथ-साथ चीनी और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाती है।
पेट्रोल में एथेनॉल का फायदा अगर ईंधन के मोर्चे पर मिल रहा है, तो क्या उसकी कीमत रसोई में बढ़ती चीनी के रूप में आम आदमी को चुकानी पड़ रही है? यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।