आजकल पेट्रोल पंप पर E20 पेट्रोल का नाम तेजी से सुनने को मिल रहा है। कई लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर पेट्रोल में मिलाया जाने वाला एथेनॉल (Ethanol) क्या होता है? क्या यह सच में गन्ने से बनता है? और इसे बनाने की पूरी प्रक्रिया क्या है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
एथेनॉल क्या है?
एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे गन्ने के रस, शीरा (Molasses), मक्का, टूटे चावल और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। भारत में ईंधन के रूप में उपयोग होने वाला एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और उसके उप-उत्पाद शीरा से तैयार किया जाता है।
गन्ने से एथेनॉल कैसे बनता है?
1. गन्ने की पेराई
सबसे पहले गन्ने को चीनी मिल में भेजा जाता है, जहां उससे रस निकाला जाता है। चीनी बनने के बाद जो शीरा (Molasses) बचता है, वही एथेनॉल बनाने का प्रमुख कच्चा माल होता है।
2. किण्वन (Fermentation)
शीरा या गन्ने के रस में यीस्ट (खमीर) मिलाया जाता है। लगभग 48 से 72 घंटे के भीतर यीस्ट उसमें मौजूद शर्करा को एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में बदल देता है।
3. आसवन (Distillation)
किण्वन के बाद बने मिश्रण को विशेष मशीनों में गर्म किया जाता है। गर्म करने पर एथेनॉल वाष्प बनकर अलग हो जाता है और उसे ठंडा करके तरल रूप में एकत्र किया जाता है।
4. शुद्धिकरण
इसके बाद एथेनॉल से बचा हुआ पानी हटाया जाता है, जिससे लगभग 99.5 प्रतिशत शुद्ध ईंधन-ग्रेड एथेनॉल तैयार होता है।
5. पेट्रोल में मिश्रण
तैयार एथेनॉल को तेल कंपनियों के डिपो में पेट्रोल के साथ मिलाया जाता है।
- E10 पेट्रोल = 10% एथेनॉल + 90% पेट्रोल
- E20 पेट्रोल = 20% एथेनॉल + 80% पेट्रोल
यही ईंधन बाद में पेट्रोल पंपों तक पहुंचता है।
सरकार एथेनॉल को क्यों बढ़ावा दे रही है?
भारत हर साल बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से विदेशी तेल पर निर्भरता कम होती है, किसानों को गन्ने का बेहतर बाजार मिलता है, चीनी उद्योग को अतिरिक्त आय होती है और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलती है।
•क्या एथेनॉल वाला पेट्रोल सुरक्षित है?
नई पीढ़ी की अधिकांश कारें और बाइक E20 पेट्रोल को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं। हालांकि, पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी कंपनी की सलाह के अनुसार ही एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग करना चाहिए।
गन्ने से बनने वाला एथेनॉल सिर्फ एक वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों, उद्योग और पर्यावरण—तीनों को लाभ मिलने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग और बढ़ने की संभावना है।
गन्ने से बने एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने के प्रमुख लाभ
1. विदेशी तेल पर निर्भरता कम होती है
भारत कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा आयात करता है। एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल की खपत घटती है और आयात बिल कम हो सकता है।
2. किसानों को फायदा मिलता है
गन्ने और शीरे (Molasses) की मांग बढ़ने से किसानों और चीनी मिलों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।
3. प्रदूषण कम करने में मदद
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से कुछ प्रदूषक उत्सर्जन कम हो सकता है, जिससे पर्यावरण को लाभ मिलता है।
4. देश में रोजगार बढ़ता है
एथेनॉल उत्पादन से जुड़े डिस्टिलरी, परिवहन और कृषि क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
5. ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है
देश में ही ईंधन का एक हिस्सा तैयार होने से वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति पर निर्भरता कुछ कम होती है।
6. चीनी उद्योग को सहारा मिलता है
अतिरिक्त गन्ने और शीरे का उपयोग एथेनॉल बनाने में होने से चीनी मिलों की आय के नए स्रोत बनते हैं।
एथेनॉल कृषि आधारित संसाधनों से बनता है, इसलिए इसे पेट्रोल की तुलना में अधिक नवीकरणीय ईंधन माना जाता है।
किसानों के लिए सबसे बड़ा फायदा
यदि गन्ने का उत्पादन अधिक हो और चीनी की मांग कम हो, तो अतिरिक्त गन्ने या शीरे से एथेनॉल बनाकर किसानों को भुगतान और चीनी मिलों को बेहतर आय का अवसर मिल सकता है। इससे गन्ना अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है।