EDITORIAL / 21 जून को होने वाली NEET री-एग्जाम को लेकर देश के कई राज्यों ने अपने विद्यार्थियों के लिए विशेष सुविधाओं की घोषणा की है। दिल्ली और पंजाब ने छात्रों के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी है। उत्तर प्रदेश ने राज्य परिवहन निगम की बसों में 50% किराया छूट देने का फैसला किया है। वहीं हरियाणा में परीक्षा केंद्रों पर हेल्प डेस्क, मेडिकल सहायता, पेयजल और बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था की तैयारी की गई है।
ऐसे में छत्तीसगढ़ के छात्रों के बीच एक सवाल तेजी से उठ रहा है—क्या हमारे राज्य के विद्यार्थियों को भी ऐसी राहत नहीं मिलनी चाहिए?
राज्य के कई छात्र गांवों और दूरदराज के इलाकों से परीक्षा देने शहरों तक पहुंचते हैं। किसी को 100 तो किसी को 200 किलोमीटर से अधिक का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में यात्रा खर्च, रहने और खाने की व्यवस्था कई परिवारों के लिए चिंता का विषय बन जाती है।
जब दूसरे राज्य अपने विद्यार्थियों का आर्थिक बोझ कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं, तब छत्तीसगढ़ के छात्र भी उम्मीद कर रहे हैं कि उनके लिए भी कुछ विशेष व्यवस्था की जाए।
छात्रों के मन में उठ रहे सवाल
•क्या छत्तीसगढ़ में भी NEET अभ्यर्थियों को बस किराए में छूट मिलनी चाहिए?
•क्या दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए विशेष सहायता की व्यवस्था हो सकती है?
•क्या परीक्षा के दिन अतिरिक्त परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है?
•क्या प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों को राहत देने वाली कोई स्थायी नीति बनाई जाएगी?
शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को अनुकूल वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अब देखना यह होगा कि इन सवालों पर संबंधित विभाग और सरकार क्या रुख अपनाते हैं।
यह किसी पर आरोप लगाने का विषय नहीं, बल्कि उन हजारों विद्यार्थियों की अपेक्षाओं का सवाल है जो अपने भविष्य के लिए कठिन मेहनत कर रहे हैं। शिक्षा को बढ़ावा देने की बात अक्सर की जाती है, लेकिन छात्र पूछ रहे हैं कि क्या अब समय नहीं आ गया है कि ऐसी बड़ी परीक्षाओं में उन्हें कुछ अतिरिक्त सहयोग भी मिले?
(यह लेख छात्रों के बीच उठ रहे सवालों और जनचर्चा पर आधारित एक राय/संपादकीय है।)